सलोनी तिवारी: कानपुर, 14 मार्च 2024 – इस्कॉन कानपुर में श्री चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य उत्सव, गौर पूर्णिमा, भक्तिपूर्ण माहौल में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
श्री चैतन्य महाप्रभु: प्रेम और करुणा का अवतार
श्री चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य आज से लगभग 536 वर्ष पूर्व श्री मायापुर, नवद्वीप धाम (बंगाल) में हुआ था। वैदिक शास्त्रों में वर्णित है कि वे स्वयं श्री कृष्ण हैं, जो श्रीमती राधा रानी के प्रेम भाव को अनुभव करने के लिए इस संसार में अवतरित हुए। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन आंदोलन का प्रचार कर संपूर्ण विश्व को भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
उत्सव की भव्यता और भक्तों की श्रद्धा
गौर पूर्णिमा उत्सव की शुरुआत प्रातःकालीन मंगल आरती एवं दर्शन आरती से हुई, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। इस्कॉन मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया, और श्री श्री राधा माधव, श्री श्री जानकी वल्लभ लक्ष्मण हनुमान जी एवं श्री श्री निताई गौर सुंदर के दिव्य विग्रहों का अद्भुत श्रृंगार किया गया।
वरिष्ठ भक्त श्रीमन राधे श्याम दास जी (आईआईटी मुंबई के गोल्ड मेडलिस्ट) ने श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं और शिक्षाओं पर आधारित प्रेरणादायक प्रवचन दिया। उन्होंने भक्तों को आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रेरित किया और आईआईटी एवं अन्य महाविद्यालयों से आए छात्रों के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया।
अभिषेक और छप्पन भोग का दिव्य आयोजन
संध्याकालीन कार्यक्रम में श्री श्री निताई गौर सुंदर का पंचगव्य एवं चांदी के कलशों द्वारा भव्य महा अभिषेक संपन्न हुआ। कानपुर के भक्तों ने प्रेमपूर्वक छप्पन भोग अर्पित किया और गौर आरती के दौरान हरे कृष्ण महामंत्र की धुन पर नृत्य किया।
आध्यात्मिक रोमांच और महाप्रसाद वितरण
संपूर्ण मंदिर परिसर वैष्णव भजनों और हरे कृष्ण महामंत्र के दिव्य उच्चारण से गूंज उठा, जिससे भक्तों को नवद्वीप धाम की अनुभूति हुई। अंत में सभी भक्तों को कृष्ण प्रसाद वितरित किया गया, जिससे यह आध्यात्मिक उत्सव और भी आनंदमय बन गया।
इस उल्लासमय गौर पूर्णिमा महोत्सव ने भक्तों को श्री चैतन्य महाप्रभु की महिमा का साक्षात्कार करने का अद्भुत अवसर प्रदान किया।